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सभ्यताओं का उदय भारतवर्ष

ऐतिहासिक साक्ष्यों के आधार पर मानव जाति का उदय अफ्रीका महाद्वीप को माना जाता है लेकिन वह मानव सभ्य नहीं था।जब सभ्यता की बात आती है तो हमें एशिया की ओर देखना पड़ता है क्योंकि इतिहास और ऐतिहासिक साक्ष्य हमें यही बताते है कि मानव ने सभ्यता का पाठ एशिया में आकर ही सीखा। इसलिए एशिया को सभ्यता का पालना कहा जाता है।और एशिया में भी कहां? भारतीय उपमहाद्वीप में। जहां उसने पहली बार एक स्थान पर रुककर बसना प्रारंभ किया।इससे पहले मनुष्य खानाबदोश जीवन जिया करता था;मतलब केवल खाने की तलाश में भटकना परंतु अब परिस्थितियां बदल रही थी। जिसके निम्न कारण है। १. मनुष्य अब खेती करना सीख रहा था।खेती करने के लिए एक स्थान पर रुकना पड़ता है। २. खेती करने से उसे भोजन के लिए भटकना नहीं पड़ रहा था,जिससे अब उसने अन्य चीजों के बारे में सोचना प्रारंभ किया। जैसे i.आवास- किसी भी एक स्थान पर रुकने के लिए एक उचित आवास की व्यवस्था करनी होती है।जिसके लिए हमे सोच - विचार करना पड़ता है। सोच - विचार के द्वारा ही सभ्यता की शुरुआत होती है।   बहरहाल। भारत में आज से लगभर ११००० साल पहले कृषि अपनी उन्नत अवस्था में थी।' फ्रांस'...

भारत क्या है?

भारत क्या है? भारत क्या है ,जब ये प्रश्न पूछा जाता है तो हम केवल यह कहकर अपना पल्ला नहीं झाड़ सकते की यह लगभग ३३ लाख वर्ग किलोमीटर की भूमि का टुकड़ा मात्र है।जिसमे २९ राज्य एवम् ८ केंद्रशासित राज्य है। भारत इस सब से कही अधिक है। कुछ लोग भारत की अनेकता में एकता गिनाकर भी भारत की पहचान को समेटने का प्रयास करते है।जो मुझे नही लगता की पर्याप्त है। मैं समझता हूं कि भारत सनातन की जन्मस्थली होने के साथ - साथ सनातन की आत्मा की रक्षा हेतु 'भीष्म' की भांति अपनी प्रतिज्ञा के पालन हेतु प्रतिबद्ध है। जिसने  बौद्ध ,जैन, शैव और वैष्णव शाखाओं को जन्म देते हुए स्लाम और ईसाई जैसे तलवार और षडयंत्र के बल पर विस्तारवादी मान्यताओं के अत्याचारों को भी भली प्रकार देखा ,समझा ,और सहा है। इतना सब होने के बावजूद भी भारत आज भी खड़ा है और खड़ा ही नहीं बल्कि पूरी शान से खड़ा है। इसके गौरव को देखकर लगता है कि मानो कह रहा है कि मेरा जिम्मा सिर्फ सनातन की रक्षा ही नहीं अपितु सम्पूर्ण धारा की रक्षा के साथ-साथ मानव सभ्यता और प्रकृति का सम्मान भी मेरा उद्देश्य है।और मैं अपने मार्ग और कार्य के प्रति सचेत हूं। और ये...